लोअर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन के संकेत, कारण और डॉक्टर से कब लें सलाह
सोनीपत: लोअर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (LRTI) श्वसन तंत्र के उन हिस्सों को प्रभावित करता है, जो सामान्य सर्दी-जुकाम की तुलना में अधिक गहराई में स्थित होते हैं। इसमें ब्रोंकाई, ब्रोंकिओल्स और फेफड़े शामिल हैं। सामान्य सर्दी के मुकाबले एलआरटीआई में सांस से जुड़ी परेशानी अधिक गंभीर हो सकती है और कुछ मामलों में चिकित्सकीय उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है। इसके लक्षणों और चेतावनी संकेतों को समय रहते पहचानना बीमारी को गंभीर होने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
एलआरटीआई के अंतर्गत कई प्रकार के संक्रमण शामिल हो सकते हैं। ब्रोंकाइटिस में श्वसन नलिकाओं में सूजन होती है, जिसके कारण लगातार खांसी और बलगम की समस्या हो सकती है। निमोनिया फेफड़ों का संक्रमण है, जिसमें बुखार, सीने में दर्द और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। वहीं, ब्रोंकिओलाइटिस में फेफड़ों की छोटी श्वसन नलिकाओं में सूजन होती है और यह मुख्य रूप से शिशुओं तथा छोटे बच्चों में देखने को मिलता है।
मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग के चेस्ट डिजीजेज एंड इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी विभाग के प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉ. मनीष कुमार अग्रवाल ने बताया “एलआरटीआई का सबसे सामान्य कारण वायरस हैं, जिनमें इन्फ्लुएंजा और रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस (RSV) प्रमुख हैं। कुछ संक्रमण बैक्टीरिया के कारण भी होते हैं, जिनमें चिकित्सक की सलाह के अनुसार एंटीबायोटिक की आवश्यकता पड़ सकती है। फंगल संक्रमण अपेक्षाकृत कम होते हैं, लेकिन कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में इनका जोखिम बढ़ सकता है। धूम्रपान, वायु प्रदूषण, कार्यस्थल पर धूल या अन्य हानिकारक पदार्थों के संपर्क में रहना, खराब वेंटिलेशन तथा कुछ पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याएं भी एलआरटीआई होने और उसके गंभीर रूप लेने का खतरा बढ़ा सकती हैं।
एलआरटीआई के लक्षण संक्रमण के प्रकार और उसकी गंभीरता के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं। लगातार रहने वाली खांसी, कभी-कभी बलगम के साथ खांसी, सांस फूलना या सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द या असहजता, बुखार और ठंड लगना, सांस लेते समय घरघराहट या असामान्य आवाज, बलगम का अधिक बनना तथा थकान और कमजोरी इसके सामान्य लक्षण हैं।
डॉ. मनीष ने आगे बताया “एलआरटीआई का उपचार उसके कारण और गंभीरता पर निर्भर करता है। अधिकांश वायरल संक्रमणों में एंटीबायोटिक की आवश्यकता नहीं होती और पर्याप्त आराम, पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना तथा बुखार या दर्द को नियंत्रित करने के लिए उचित दवाएं लक्षणों में राहत देने में मदद कर सकती हैं। यदि संक्रमण बैक्टीरियल पाया जाता है या चिकित्सक को इसकी प्रबल आशंका होती है, तो एंटीबायोटिक दी जा सकती है, जिसे डॉक्टर की सलाह के अनुसार पूरा करना जरूरी है।
कुछ लक्षण ऐसे हैं जिनमें डॉक्टर से चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए। लगातार या बढ़ती हुई खांसी, सांस फूलना या तेज सांस चलना, तेज या लगातार बना रहने वाला बुखार, सांस लेने या खांसने के दौरान सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी, भ्रम या असामान्य रूप से अधिक नींद आना, बलगम में खून आना या सामान्य देखभाल के बावजूद लक्षणों में सुधार न होना चिकित्सकीय जांच की जरूरत का संकेत हो सकता है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों, लंबे समय से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्तियों को लक्षण दिखाई देने पर अपेक्षाकृत जल्दी डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि उनमें जटिलताएं तेजी से विकसित हो सकती हैं।
