बीएलके-मैक्स हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने स्टेज III ब्रेस्ट कैंसर से जूझ रही 47 वर्षीय महिला का किया सफलतापूर्वक इलाज

वाराणसी, : नई दिल्ली स्थित बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने वाराणसी के भोजूबीर निवासी 47 वर्षीय महिला का इलाज किया, जिन्हें लोकली एडवांस्ड स्टेज III ब्रेस्ट कैंसर का पता चला था। मरीज को कीमोथेरेपी के आठ साइकिल दिए गए, जिसके बाद इलाज के तहत ब्रेस्ट कंजर्वेशन सर्जरी की गई।
श्रीमती रजनी सिंह को ब्रेस्ट कैंसर था, जो बगल, छाती के अंदर और कॉलरबोन के ऊपर स्थित लिम्फ नोड्स के कई समूहों तक फैल चुका था। मैमोग्राफी, ब्रेस्ट टिश्यू बायोप्सी और पूरे शरीर के पीईटी-सीटी स्कैन (PET-CT scan) सहित विस्तृत जांचों के जरिए कैंसर की पुष्टि की गई और बीमारी के फैलाव का आकलन किया गया। कैंसर की स्थानीय रूप से एडवांस्ड स्थिति को देखते हुए, डॉक्टरों ने सर्जरी से पहले कीमोथेरेपी देने की सलाह दी, ताकि ट्यूमर का आकार और बीमारी का बोझ कम किया जा सके तथा सर्जरी को बेहतर तरीके से अंजाम दिया जा सके।
इस मामले पर बात करते हुए, बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नई दिल्ली के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के वाइस चेयरमैन एवं यूनिट हेड, डॉ. चंद्रगौड़ा डोडागौडर, ने कहा, “यह स्थानीय रूप से एडवांस्ड ब्रेस्ट कैंसर का एक चुनौतीपूर्ण मामला था, जिसमें शुरुआत में ही सर्जरी करना सबसे उपयुक्त विकल्प नहीं माना गया। इसलिए, हमने सर्जरी से पहले बीमारी को नियंत्रित करने और ट्यूमर का आकार कम करने के लिए गहन कीमोथेरेपी का उपचार निर्धारित किया।
गहन कीमोथेरेपी के कारण वाइट ब्लड सेल्स की संख्या कम हो सकती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसे ध्यान में रखते हुए, मरीज को वाइट ब्लड सेल्स का स्तर बनाए रखने में मदद के लिए ग्रोथ फैक्टर सपोर्ट दिया गया। इसके साथ ही, मतली और उल्टी को रोकने के लिए दवाएं भी दी गईं। कीमोथेरेपी पूरी होने के बाद उनकी ब्रेस्ट कंजर्वेशन सर्जरी की गई। इस प्रक्रिया में कैंसरस टिशूस को हटाते हुए स्तन के अधिकतम संभव हिस्से को सुरक्षित रखा जाता है।
इस बारे में आगे जानकारी देते हुए, डॉ. डोडागौडर ने कहा, “ब्रेस्ट कैंसर के उपचार के प्रति प्रतिक्रिया का आकलन क्लिनिकल जांच, इमेजिंग और सर्जरी के दौरान निकाले गए टिशूस की जांच के संयुक्त आधार पर किया जाना चाहिए। पीईटी-सीटी स्कैन के नतीजे उत्साहजनक थे, लेकिन सर्जरी के दौरान निकाले गए टिशूस में बीमारी के अवशेष मिलना आगे के उपचार की योजना बनाने में एक महत्वपूर्ण पहलू है।